संक्षिप्त सार
यह अनुच्छेद उपराष्ट्रपति के कार्यकाल, त्यागपत्र और हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है। उपराष्ट्रपति का सामान्य कार्यकाल पाँच वर्ष होता है। वह राष्ट्रपति को संबोधित लिखित त्यागपत्र दे सकता है। उसे राज्यसभा में पारित संकल्प और लोकसभा की सहमति से हटाया जा सकता है। हटाने के प्रस्ताव से पहले निर्धारित नोटिस आवश्यक है। नया उपराष्ट्रपति पद ग्रहण न करे तब तक वह पद पर बना रह सकता है। सरल भाषा में, यह अनुच्छेद संविधान की उस व्यवस्था को मजबूत करता है जिससे शासन नियमों, जिम्मेदारियों और तय प्रक्रिया के अनुसार चलता है। संविधान केवल अधिकारों की सूची नहीं है, बल्कि यह भी बताता है कि कौन सा पद कैसे बनेगा, उसकी शक्ति कहाँ तक होगी, जवाबदेही किसके प्रति होगी और किसी विवाद या रिक्ति की स्थिति में काम कैसे चलेगा। इसी कारण इस अनुच्छेद को पढ़ते समय केवल एक पंक्ति याद करना काफी नहीं होता; उसके पीछे की संवैधानिक सोच भी समझनी चाहिए। परीक्षा दृष्टि से इसके मुख्य बिंदु हैं: अनुच्छेद संख्या, संबंधित पद या संस्था, चुनाव/नियुक्ति/कार्यकाल/शक्ति से जुड़ी शर्तें, और यह कि यह प्रावधान किस भाग से संबंधित है। प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे अनुच्छेदों से सीधे प्रश्न, मिलान वाले प्रश्न, कथन-कारण प्रश्न और सही/गलत कथन पूछे जाते हैं। इसलिए इसे मूल तथ्य, सरल अर्थ और व्यावहारिक महत्व—तीनों रूपों में याद करना उपयोगी रहता है।
अनुच्छेद की हिंदी में व्याख्या
यह अनुच्छेद उपराष्ट्रपति के कार्यकाल, त्यागपत्र और हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है। उपराष्ट्रपति का सामान्य कार्यकाल पाँच वर्ष होता है। वह राष्ट्रपति को संबोधित लिखित त्यागपत्र दे सकता है। उसे राज्यसभा में पारित संकल्प और लोकसभा की सहमति से हटाया जा सकता है। हटाने के प्रस्ताव से पहले निर्धारित नोटिस आवश्यक है। नया उपराष्ट्रपति पद ग्रहण न करे तब तक वह पद पर बना रह सकता है। सरल भाषा में, यह अनुच्छेद संविधान की उस व्यवस्था को मजबूत करता है जिससे शासन नियमों, जिम्मेदारियों और तय प्रक्रिया के अनुसार चलता है। संविधान केवल अधिकारों की सूची नहीं है, बल्कि यह भी बताता है कि कौन सा पद कैसे बनेगा, उसकी शक्ति कहाँ तक होगी, जवाबदेही किसके प्रति होगी और किसी विवाद या रिक्ति की स्थिति में काम कैसे चलेगा। इसी कारण इस अनुच्छेद को पढ़ते समय केवल एक पंक्ति याद करना काफी नहीं होता; उसके पीछे की संवैधानिक सोच भी समझनी चाहिए। परीक्षा दृष्टि से इसके मुख्य बिंदु हैं: अनुच्छेद संख्या, संबंधित पद या संस्था, चुनाव/नियुक्ति/कार्यकाल/शक्ति से जुड़ी शर्तें, और यह कि यह प्रावधान किस भाग से संबंधित है। प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे अनुच्छेदों से सीधे प्रश्न, मिलान वाले प्रश्न, कथन-कारण प्रश्न और सही/गलत कथन पूछे जाते हैं। इसलिए इसे मूल तथ्य, सरल अर्थ और व्यावहारिक महत्व—तीनों रूपों में याद करना उपयोगी रहता है।
Article in English
Article 67 relates to Term of office of Vice-President. It is part of The Union Executive and is important for understanding the constitutional structure and for exam preparation.
मुख्य बिंदु
- अनुच्छेद 67 का मुख्य विषय: उपराष्ट्रपति की पदावधि।
- यह भाग V, अध्याय I - संघ की कार्यपालिका के अंतर्गत आता है।
- परीक्षा में article number, विषय और संबंधित संस्था/प्रक्रिया पूछी जा सकती है।
Exam Useful Points
- Article 67 — Term of office of Vice-President.
- भाग/Chapter: भाग V, अध्याय I.
- याद रखने वाला बिंदु: उपराष्ट्रपति पद ग्रहण की तारीख से पाँच वर्ष तक पद पर रहता है, राष्ट्रपति को त्यागपत्र दे सकता है और राज्यसभा प्रस्ताव व लोकसभा सहमति से हटाया जा सकता है।