संक्षिप्त सार
यह अनुच्छेद बताता है कि सभापति के पद रिक्त होने या अनुपस्थिति में उपसभापति या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त व्यक्ति राज्यसभा के सभापति के कर्तव्यों का पालन कर सकता है। इसी प्रकार यदि उपसभापति भी अनुपस्थित हो तो नियमों के अनुसार अन्य व्यक्ति सदन की कार्यवाही चला सकता है। इसका उद्देश्य यह है कि पीठासीन अधिकारी की अनुपस्थिति से सदन का कामकाज रुक न जाए। सरल भाषा में, यह अनुच्छेद संविधान की उस व्यवस्था को मजबूत करता है जिससे शासन नियमों, जिम्मेदारियों और तय प्रक्रिया के अनुसार चलता है। संविधान केवल अधिकारों की सूची नहीं है, बल्कि यह भी बताता है कि कौन सा पद कैसे बनेगा, उसकी शक्ति कहाँ तक होगी, जवाबदेही किसके प्रति होगी और किसी विवाद या रिक्ति की स्थिति में काम कैसे चलेगा। इसी कारण इस अनुच्छेद को पढ़ते समय केवल एक पंक्ति याद करना काफी नहीं होता; उसके पीछे की संवैधानिक सोच भी समझनी चाहिए। परीक्षा दृष्टि से इसके मुख्य बिंदु हैं: अनुच्छेद संख्या, संबंधित पद या संस्था, चुनाव/नियुक्ति/कार्यकाल/शक्ति से जुड़ी शर्तें, और यह कि यह प्रावधान किस भाग से संबंधित है। प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे अनुच्छेदों से सीधे प्रश्न, मिलान वाले प्रश्न, कथन-कारण प्रश्न और सही/गलत कथन पूछे जाते हैं। इसलिए इसे मूल तथ्य, सरल अर्थ और व्यावहारिक महत्व—तीनों रूपों में याद करना उपयोगी रहता है।
अनुच्छेद की हिंदी में व्याख्या
यह अनुच्छेद बताता है कि सभापति के पद रिक्त होने या अनुपस्थिति में उपसभापति या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त व्यक्ति राज्यसभा के सभापति के कर्तव्यों का पालन कर सकता है। इसी प्रकार यदि उपसभापति भी अनुपस्थित हो तो नियमों के अनुसार अन्य व्यक्ति सदन की कार्यवाही चला सकता है। इसका उद्देश्य यह है कि पीठासीन अधिकारी की अनुपस्थिति से सदन का कामकाज रुक न जाए। सरल भाषा में, यह अनुच्छेद संविधान की उस व्यवस्था को मजबूत करता है जिससे शासन नियमों, जिम्मेदारियों और तय प्रक्रिया के अनुसार चलता है। संविधान केवल अधिकारों की सूची नहीं है, बल्कि यह भी बताता है कि कौन सा पद कैसे बनेगा, उसकी शक्ति कहाँ तक होगी, जवाबदेही किसके प्रति होगी और किसी विवाद या रिक्ति की स्थिति में काम कैसे चलेगा। इसी कारण इस अनुच्छेद को पढ़ते समय केवल एक पंक्ति याद करना काफी नहीं होता; उसके पीछे की संवैधानिक सोच भी समझनी चाहिए। परीक्षा दृष्टि से इसके मुख्य बिंदु हैं: अनुच्छेद संख्या, संबंधित पद या संस्था, चुनाव/नियुक्ति/कार्यकाल/शक्ति से जुड़ी शर्तें, और यह कि यह प्रावधान किस भाग से संबंधित है। प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे अनुच्छेदों से सीधे प्रश्न, मिलान वाले प्रश्न, कथन-कारण प्रश्न और सही/गलत कथन पूछे जाते हैं। इसलिए इसे मूल तथ्य, सरल अर्थ और व्यावहारिक महत्व—तीनों रूपों में याद करना उपयोगी रहता है।
Article in English
Article 91 relates to Power of Deputy Chairman or other person to perform duties. It is part of Officers of Parliament and is important for understanding the constitutional structure and for exam preparation.
मुख्य बिंदु
- अनुच्छेद 91 का मुख्य विषय: सभापति के कर्तव्यों के पालन की शक्ति।
- यह भाग V, अध्याय II - संसद के अधिकारी के अंतर्गत आता है।
- परीक्षा में article number, विषय और संबंधित संस्था/प्रक्रिया पूछी जा सकती है।
Exam Useful Points
- Article 91 — Power of Deputy Chairman or other person to perform duties.
- भाग/Chapter: भाग V, अध्याय II.
- याद रखने वाला बिंदु: सभापति का पद रिक्त होने या अनुपस्थिति में उपसभापति या निर्धारित सदस्य सभापति के कर्तव्य निभाता है।