संक्षिप्त सार
यह अनुच्छेद कहता है कि भारत में एक उपराष्ट्रपति होगा। उपराष्ट्रपति भारतीय संघ का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उसका मुख्य महत्व राष्ट्रपति पद में आकस्मिक रिक्ति या अनुपस्थिति की स्थिति में बढ़ता है। इसके साथ ही वह राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है। इस प्रकार यह पद कार्यपालिका और संसद, दोनों से जुड़ा हुआ है। सरल भाषा में, यह अनुच्छेद संविधान की उस व्यवस्था को मजबूत करता है जिससे शासन नियमों, जिम्मेदारियों और तय प्रक्रिया के अनुसार चलता है। संविधान केवल अधिकारों की सूची नहीं है, बल्कि यह भी बताता है कि कौन सा पद कैसे बनेगा, उसकी शक्ति कहाँ तक होगी, जवाबदेही किसके प्रति होगी और किसी विवाद या रिक्ति की स्थिति में काम कैसे चलेगा। इसी कारण इस अनुच्छेद को पढ़ते समय केवल एक पंक्ति याद करना काफी नहीं होता; उसके पीछे की संवैधानिक सोच भी समझनी चाहिए। परीक्षा दृष्टि से इसके मुख्य बिंदु हैं: अनुच्छेद संख्या, संबंधित पद या संस्था, चुनाव/नियुक्ति/कार्यकाल/शक्ति से जुड़ी शर्तें, और यह कि यह प्रावधान किस भाग से संबंधित है। प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे अनुच्छेदों से सीधे प्रश्न, मिलान वाले प्रश्न, कथन-कारण प्रश्न और सही/गलत कथन पूछे जाते हैं। इसलिए इसे मूल तथ्य, सरल अर्थ और व्यावहारिक महत्व—तीनों रूपों में याद करना उपयोगी रहता है। इस अनुच्छेद को भारत का उपराष्ट्रपति के संदर्भ में पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि भारतीय संविधान ने शासन को व्यक्ति-आधारित नहीं बल्कि संस्था-आधारित बनाया है। इससे निर्णयों में निरंतरता, विधिक वैधता और लोकतांत्रिक नियंत्रण बना रहता है।
अनुच्छेद की हिंदी में व्याख्या
यह अनुच्छेद कहता है कि भारत में एक उपराष्ट्रपति होगा। उपराष्ट्रपति भारतीय संघ का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उसका मुख्य महत्व राष्ट्रपति पद में आकस्मिक रिक्ति या अनुपस्थिति की स्थिति में बढ़ता है। इसके साथ ही वह राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है। इस प्रकार यह पद कार्यपालिका और संसद, दोनों से जुड़ा हुआ है। सरल भाषा में, यह अनुच्छेद संविधान की उस व्यवस्था को मजबूत करता है जिससे शासन नियमों, जिम्मेदारियों और तय प्रक्रिया के अनुसार चलता है। संविधान केवल अधिकारों की सूची नहीं है, बल्कि यह भी बताता है कि कौन सा पद कैसे बनेगा, उसकी शक्ति कहाँ तक होगी, जवाबदेही किसके प्रति होगी और किसी विवाद या रिक्ति की स्थिति में काम कैसे चलेगा। इसी कारण इस अनुच्छेद को पढ़ते समय केवल एक पंक्ति याद करना काफी नहीं होता; उसके पीछे की संवैधानिक सोच भी समझनी चाहिए। परीक्षा दृष्टि से इसके मुख्य बिंदु हैं: अनुच्छेद संख्या, संबंधित पद या संस्था, चुनाव/नियुक्ति/कार्यकाल/शक्ति से जुड़ी शर्तें, और यह कि यह प्रावधान किस भाग से संबंधित है। प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे अनुच्छेदों से सीधे प्रश्न, मिलान वाले प्रश्न, कथन-कारण प्रश्न और सही/गलत कथन पूछे जाते हैं। इसलिए इसे मूल तथ्य, सरल अर्थ और व्यावहारिक महत्व—तीनों रूपों में याद करना उपयोगी रहता है। इस अनुच्छेद को भारत का उपराष्ट्रपति के संदर्भ में पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि भारतीय संविधान ने शासन को व्यक्ति-आधारित नहीं बल्कि संस्था-आधारित बनाया है। इससे निर्णयों में निरंतरता, विधिक वैधता और लोकतांत्रिक नियंत्रण बना रहता है।
Article in English
Article 63 relates to The Vice-President of India. It is part of The Union Executive and is important for understanding the constitutional structure and for exam preparation.
मुख्य बिंदु
- अनुच्छेद 63 का मुख्य विषय: भारत का उपराष्ट्रपति।
- यह भाग V, अध्याय I - संघ की कार्यपालिका के अंतर्गत आता है।
- परीक्षा में article number, विषय और संबंधित संस्था/प्रक्रिया पूछी जा सकती है।
Exam Useful Points
- Article 63 — The Vice-President of India.
- भाग/Chapter: भाग V, अध्याय I.
- याद रखने वाला बिंदु: भारत में उपराष्ट्रपति के पद की व्यवस्था करता है। यह देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।